कैसे?

तेरी तस्वीर मैं सीने से लगाऊँ कैसे? दिल से निकाल के पन्नो पे छपाऊँ कैसे? तुझे चाहता है कोई खुद से भी जियादा दिल का इस फैसला तुझे बताऊँ कैसे? बस तेरी तस्वीर छपी है मेरे इस दिल में तू ही तू है बस क्यूँ मेरी हर इक मंजिल में तुझे इतना टुट कर चाहता... Continue Reading →

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वो मुझ से

​वो मुझसे दूर है बहुत, मैं उस से दूर हूं बहुत कितने फासले हैं फिर भी, वादों का मिजाज, कुछ कम नहीं होता शेख़ महम्मद शरीफ़ ई.

Mahruum

​Samndar me rahkar bhi Mahruum hu.n Ishq me.n lachaar, ek tarfa aashiq ki tarah - MahammadSharif Ilahi Shaikh

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